ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने बुधवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर हज़ारों शिक्षकों से भेंट की और उनकी भूमिका को सभ्यता का निर्माण करने वाला बताया। वरिष्ठ नेता ने बल देकर कहा कि मानवीय पूंजी एक राष्ट्र की पूंजी है। इसी प्रकार उन्होंने कहा कि शिक्षक सभ्यता की आधारशिला रखने वाले और अज्ञानता व निरक्षरता के मैदान में जेहाद करने वाले हैं।
आज वैज्ञानिक प्रगति में ईरान अग्रिम देशों में है। निश्चित रूप से ईरानी राष्ट्र के भविष्य का आधार भी ज्ञान विज्ञान में प्रगति होगा। इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने दुश्मन की विभिन्न मोर्चों पर युद्ध की तय्यारी की ओर से सचेत करते हुए ईरानी राष्ट्र से पूरी तरह तय्यार रहने पर बल दिया है।
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने बुधवार को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के एक गुट को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि दुश्मन ने युद्ध जैसी मुद्रा अपना रखी है और राजनीति, अर्थव्यवस्था और गुप्तचर सहित विभिन्न क्षेत्रों में ईरान के ख़िलाफ़ हमले में लगा हुआ।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि दुश्मन सैन्य दृष्टि से रणक्षेत्र में नज़र नहीं आ रहा है लेकिन उसकी सशस्त्र सेनाएं हम पर नज़र रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि दुश्मन की युद्ध जैसी मुद्रा की स्थिति में ईरानी राष्ट्र के सभी वर्ग को दुश्मन के ख़िलाफ़ तय्यार रहना चाहिए।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा कि अमरीका और ज़ायोनी सभी क्षेत्र में ईरान के ख़िलाफ़ साज़िश व कुप्रयास में लगे हुए हैं जिससे मौजूदा अमरीकी सरकार भी अपवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व अमरीकी सरकारें भी इसी तरह की हरकतें करती थीं परंतु मख़्मली दस्ताना पहने रहती थीं।
उन्होंने ईरान के ख़िलाफ़ अमरीकी सरकार की दुश्मनी में तेज़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा अमरीकी राष्ट्रपति ने उन दस्तानों को हटा कर ईरान पर मेहरबानी की।
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने विश्वास दिलाया कि दुश्मन जनमत को धोखा देने के लिए अपने व्यापक प्रौपैगन्डे के बावजूद, अपनी साज़िश में न सिर्फ़ यह कि नाकाम रहेगा बल्कि उसे ही नुक़सान उठाना पड़ेगा।
उन्होंने बल दिया कि राष्ट्र एकजुट रहेगा तो दुश्मन को उसकी साज़िशों से ख़ुद ही नुक़सान पहुंचेगा।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने कहा कि हमारी युवा पीढ़ी अमरीका और ज़ायोनियों की हार और ईरानी राष्ट्र की शान को अपनी आंखों से देखेगी।
उन्होंने इसी तरह 2030 के शिक्षा एजेन्डे तथा विदेशियों के ईरान और इस्लामी देशों सहित देशों के संबंध में इसे थोपने पर विदित व निहित रूप से बल दिए जाने का कारण बयान करते हुए कहा कि इस घोषणापत्र का सार यह है कि शिक्षा व्यवस्था इस तरह बनायी जाए कि पश्चिमी विचारों को आधार बनाकर बच्चों व युवाओं को दर्शनशास्त्र, जीवन शैली और जीवन का अर्थ सिखाया जाए।
उन्होंने कहा कि ईरान ने 2016 में इस घोषणापत्र पर दस्तख़त किए हैं परंतु यूनेस्को को आधिकारिक रूप से सूचित कर दिया है कि इस एजेन्डे का जो भाग देश के सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक और नैतिक मानदंड के ख़िलाफ़ होगा उसे लागू नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि पश्चिम चाहता है कि हमारे धर्मपरायण शिक्षक अपनी क्लासों में उनके लिए सैनिक तय्यार करें ताकि हमारे छात्र उनके सेवक और वाइट कॉलर व टाई में नज़र आने वाले बर्बर बन जाएं जो बड़ी आसानी से इंसानों को मारते और इंसानों को मारने में मदद करते हैं।